क्या आप UPSC, SSC, Railway, BPSC या किसी अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं? अगर हाँ, तो भारतीय संविधान आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। इसके सभी 395 अनुच्छेदों को समझना और याद रखना कठिन हो सकता है, लेकिन सफलता के लिए यह बहुत ज़रूरी है।
यह पोस्ट आपकी इसी चुनौती को आसान बनाती है। यहाँ आपको भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 से 395 तक की एक संपूर्ण और सरल हिंदी में सूची मिलेगी। हमने हर अनुच्छेद को आसान शब्दों में समझाया है, ताकि आप इसे जल्दी समझ सकें और अपनी परीक्षा के लिए मजबूत तैयारी कर सकें। यह लेख आपके लिए एक विश्वसनीय और बेहतरीन स्रोत साबित होगा।
यहाँ भारतीय संविधान के सभी भागों और उनके अनुच्छेदों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है।
भाग I: संघ और उसका राज्य क्षेत्र (अनुच्छेद 1-4)
- अनुच्छेद 1: संघ का नाम और राज्य क्षेत्र।
- अनुच्छेद 2: नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना।
- अनुच्छेद 2A: सिक्किम को संघ के साथ जोड़ा जाना। (निरसित)
- अनुच्छेद 3: नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन।
- अनुच्छेद 4: पहली और चौथी अनुसूची तथा अनुपूरक, आनुषंगिक और परिणामिक विषयों का उपबंध करने के लिए अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन बनाई गई विधियाँ।
भाग II: नागरिकता (अनुच्छेद 5-11)
- अनुच्छेद 5: संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता।
- अनुच्छेद 6: पाकिस्तान से भारत को प्रवासन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
- अनुच्छेद 7: पाकिस्तान को प्रवासन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार।
- अनुच्छेद 8: भारतीय मूल के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार, जो भारत के बाहर रह रहे हैं।
- अनुच्छेद 9: किसी विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न होना।
- अनुच्छेद 10: नागरिकता के अधिकारों का बना रहना।
- अनुच्छेद 11: संसद द्वारा कानून बनाकर नागरिकता के अधिकार का विनियमन किया जाना।
भाग III: मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12-35)
- अनुच्छेद 12: राज्य की परिभाषा।
- अनुच्छेद 13: मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियाँ।
- अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समानता।
- अनुच्छेद 15: धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।
- अनुच्छेद 16: लोक नियोजन के विषयों में अवसर की समानता।
- अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता का अंत।
- अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत।
- अनुच्छेद 19: वाक्-स्वतंत्रता आदि से संबंधित कुछ अधिकारों का संरक्षण।
- अनुच्छेद 20: अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण।
- अनुच्छेद 21: प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण।
- अनुच्छेद 21A: शिक्षा का अधिकार।
- अनुच्छेद 22: कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण।
- अनुच्छेद 23: मानव दुर्व्यापार और बलात् श्रम का प्रतिषेध।
- अनुच्छेद 24: कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध।
- अनुच्छेद 25: अंतःकरण की और धर्म के अबाध रूप से मानने, आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 26: धार्मिक कार्यों के प्रबंधन की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 27: किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय के बारे में स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 28: कुछ शिक्षा संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थित होने के बारे में स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 29: अल्पसंख्यकों के हितों का संरक्षण।
- अनुच्छेद 30: शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यकों का अधिकार।
- अनुच्छेद 31: संपत्ति का अनिवार्य अर्जन। (निरसित)
- अनुच्छेद 31A: संपदाओं आदि के अर्जन के लिए उपबंध करने वाली विधियों की व्यावृत्ति।
- अनुच्छेद 31B: कुछ अधिनियमों और विनियमों का विधिमान्यकरण।
- अनुच्छेद 31C: कुछ निदेशक तत्वों को प्रभावी करने वाली विधियों की व्यावृत्ति।
- अनुच्छेद 31D: राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के संबंध में विधियों का विशेष प्रावधान। (निरसित)
- अनुच्छेद 32: संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
- अनुच्छेद 33: इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों का बलों आदि को लागू होने में उपांतरण करने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 34: जब किसी क्षेत्र में सेना विधि प्रवृत्त है तब इस भाग द्वारा प्रदत्त अधिकारों पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 35: इस भाग के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए विधान।
भाग IV: राज्य की नीति के निदेशक तत्व (अनुच्छेद 36-51)
- अनुच्छेद 36: परिभाषा।
- अनुच्छेद 37: इस भाग में अंतर्विष्ट तत्वों का लागू होना।
- अनुच्छेद 38: राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनाएगा।
- अनुच्छेद 39: राज्य द्वारा अनुसरणीय कुछ नीति-तत्व।
- अनुच्छेद 39A: समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता।
- अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का संगठन।
- अनुच्छेद 41: कुछ दशाओं में काम, शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार।
- अनुच्छेद 42: काम की न्यायसंगत और मानवीय दशाओं तथा प्रसूति सहायता का उपबंध।
- अनुच्छेद 43: कर्मकारों के लिए निर्वाह मजदूरी आदि।
- अनुच्छेद 43A: उद्योगों के प्रबंधन में कर्मकारों की भागीदारी।
- अनुच्छेद 43B: सहकारी समितियों का संवर्धन।
- अनुच्छेद 44: नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता।
- अनुच्छेद 45: बालकों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का उपबंध।
- अनुच्छेद 46: अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य कमजोर वर्गों के शैक्षणिक और आर्थिक हितों की अभिवृद्धि।
- अनुच्छेद 47: पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा करने तथा लोक स्वास्थ्य को सुधारने का राज्य का कर्तव्य।
- अनुच्छेद 48: कृषि और पशुपालन का संगठन।
- अनुच्छेद 48A: पर्यावरण का संरक्षण तथा संवर्धन और वन तथा वन्यजीवों की रक्षा।
- अनुच्छेद 49: राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण।
- अनुच्छेद 50: कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण।
- अनुच्छेद 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि।
भाग IV A: मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A)
- अनुच्छेद 51A: मूल कर्तव्य।
भाग V: संघ (अनुच्छेद 52-151)
- अध्याय I: कार्यपालिका
- अनुच्छेद 52: भारत का राष्ट्रपति।
- अनुच्छेद 53: संघ की कार्यपालिका शक्ति।
- अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का निर्वाचन।
- अनुच्छेद 55: राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति।
- अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति की पदावधि।
- अनुच्छेद 57: पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता।
- अनुच्छेद 58: राष्ट्रपति के पद के लिए योग्यताएँ।
- अनुच्छेद 59: राष्ट्रपति के पद के लिए शर्तें।
- अनुच्छेद 60: राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 61: राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 62: राष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि।
- अनुच्छेद 63: भारत का उपराष्ट्रपति।
- अनुच्छेद 64: उपराष्ट्रपति का राज्यों की परिषद का पदेन अध्यक्ष होना।
- अनुच्छेद 65: राष्ट्रपति के पद में आकस्मिक रिक्ति के दौरान या उसकी अनुपस्थिति में उपराष्ट्रपति का राष्ट्रपति के रूप में कार्य करना।
- अनुच्छेद 66: उपराष्ट्रपति का निर्वाचन।
- अनुच्छेद 67: उपराष्ट्रपति की पदावधि।
- अनुच्छेद 68: उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि।
- अनुच्छेद 69: उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 70: अन्य आकस्मिकताओं में राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन।
- अनुच्छेद 71: राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के निर्वाचन से संबंधित या संसक्त विषय।
- अनुच्छेद 72: क्षमा आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राष्ट्रपति की शक्ति।
- अनुच्छेद 73: संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार।
- अनुच्छेद 74: राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद।
- अनुच्छेद 75: मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध।
- अनुच्छेद 76: भारत का महान्यायवादी।
- अनुच्छेद 77: भारत सरकार के कार्य का संचालन।
- अनुच्छेद 78: राष्ट्रपति को जानकारी देने आदि के संबंध में प्रधानमंत्री के कर्तव्य।
- अध्याय II: संसद
- अनुच्छेद 79: संसद का गठन।
- अनुच्छेद 80: राज्यसभा की संरचना।
- अनुच्छेद 81: लोकसभा की संरचना।
- अनुच्छेद 82: प्रत्येक जनगणना के बाद पुनर्समायोजन।
- अनुच्छेद 83: संसद के सदनों की अवधि।
- अनुच्छेद 84: संसद की सदस्यता के लिए योग्यता।
- अनुच्छेद 85: संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन।
- अनुच्छेद 86: सदनों को अभिभाषण का और संदेश भेजने का राष्ट्रपति का अधिकार।
- अनुच्छेद 87: राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण।
- अनुच्छेद 88: सदनों के संबंध में मंत्रियों और महान्यायवादी के अधिकार।
- अनुच्छेद 89: राज्यसभा का सभापति और उपसभापति।
- अनुच्छेद 90: उपसभापति का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना।
- अनुच्छेद 91: सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति।
- अनुच्छेद 92: जब सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का संकल्प विचाराधीन हो, तब वह पीठासीन नहीं होगा।
- अनुच्छेद 93: लोकसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष।
- अनुच्छेद 94: अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना।
- अनुच्छेद 95: अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति।
- अनुच्छेद 96: जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पद से हटाने का संकल्प विचाराधीन हो, तब वह पीठासीन नहीं होगा।
- अनुच्छेद 97: सभापति और उपसभापति तथा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते।
- अनुच्छेद 98: संसद का सचिवालय।
- अनुच्छेद 99: सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 100: सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति।
- अनुच्छेद 101: स्थानों का रिक्त होना।
- अनुच्छेद 102: सदस्यता के लिए निरर्हताएँ।
- अनुच्छेद 103: सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय।
- अनुच्छेद 104: अनुच्छेद 99 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से पहले बैठने और मतदान करने के लिए दंड।
- अनुच्छेद 105: संसद के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियाँ, विशेषाधिकार आदि।
- अनुच्छेद 106: सदस्यों के वेतन और भत्ते।
- अनुच्छेद 107: विधेयकों के पुरःस्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध।
- अनुच्छेद 108: कुछ मामलों में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक।
- अनुच्छेद 109: धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 110: धन विधेयक की परिभाषा।
- अनुच्छेद 111: विधेयकों पर अनुमति।
- अनुच्छेद 112: वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट)।
- अनुच्छेद 113: संसद में प्राक्कलनों के संबंध में प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 114: विनियोग विधेयक।
- अनुच्छेद 115: अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान।
- अनुच्छेद 116: लेखा-अनुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान।
- अनुच्छेद 117: वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 118: प्रक्रिया के नियम।
- अनुच्छेद 119: संसद में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन।
- अनुच्छेद 120: संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा।
- अनुच्छेद 121: संसद में चर्चा पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 122: न्यायालयों द्वारा संसद की कार्यवाही की जाँच न किया जाना।
- अध्याय III: राष्ट्रपति की विधायी शक्तियाँ
- अनुच्छेद 123: संसद के अवकाश के दौरान अध्यादेश जारी करने की राष्ट्रपति की शक्ति।
- अध्याय IV: संघ की न्यायपालिका
- अनुच्छेद 124: उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन।
- अनुच्छेद 125: न्यायाधीशों के वेतन आदि।
- अनुच्छेद 126: कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 127: तदर्थ न्यायाधीशों की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 128: उच्चतम न्यायालय की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति।
- अनुच्छेद 129: उच्चतम न्यायालय का अभिलेख न्यायालय होना।
- अनुच्छेद 130: उच्चतम न्यायालय का स्थान।
- अनुच्छेद 131: उच्चतम न्यायालय की मूल अधिकारिता।
- अनुच्छेद 132: कुछ मामलों में उच्च न्यायालयों से अपील में उच्चतम न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता।
- अनुच्छेद 133: सिविल मामलों के संबंध में उच्च न्यायालयों से अपील में उच्चतम न्यायालय की अपीलीय अधिकारिता।
- अनुच्छेद 134: आपराधिक मामलों के संबंध में उच्च न्यायालयों से अपील में उच्चतम न्यायालय की अधिकारिता।
- अनुच्छेद 134A: अपील के लिए प्रमाणपत्र।
- अनुच्छेद 135: उच्चतम न्यायालय द्वारा मौजूदा कानून के तहत संघीय न्यायालय की अधिकारिता और शक्तियों का प्रयोग।
- अनुच्छेद 136: अपील के लिए उच्चतम न्यायालय की विशेष अनुमति।
- अनुच्छेद 137: उच्चतम न्यायालय द्वारा अपने निर्णयों या आदेशों का पुनर्विलोकन।
- अनुच्छेद 138: उच्चतम न्यायालय की अधिकारिता में वृद्धि।
- अनुच्छेद 139: कुछ रिट जारी करने की शक्ति का उच्चतम न्यायालय को प्रदान किया जाना।
- अनुच्छेद 139A: कुछ मामलों का अंतरण।
- अनुच्छेद 140: उच्चतम न्यायालय की सहायक शक्तियाँ।
- अनुच्छेद 141: उच्चतम न्यायालय द्वारा घोषित कानून का सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी होना।
- अनुच्छेद 142: उच्चतम न्यायालय के डिक्री और आदेशों का प्रवर्तन तथा प्रकटीकरण के संबंध में आदेश।
- अनुच्छेद 143: राष्ट्रपति की उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति।
- अनुच्छेद 144: सिविल और न्यायिक अधिकारियों का उच्चतम न्यायालय की सहायता में कार्य करना।
- अनुच्छेद 144A: कानूनों की संवैधानिक वैधता से संबंधित प्रश्नों का निपटारा। (निरसित)
- अनुच्छेद 145: न्यायालय के नियम आदि।
- अनुच्छेद 146: उच्चतम न्यायालय के अधिकारी और सेवक तथा व्यय।
- अनुच्छेद 147: निर्वचन।
- अध्याय V: भारत का नियंत्रक और महालेखा परीक्षक
- अनुच्छेद 148: भारत का नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG)।
- अनुच्छेद 149: नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के कर्तव्य और शक्तियाँ।
- अनुच्छेद 150: संघ और राज्यों के लेखाओं का प्ररूप।
- अनुच्छेद 151: लेखापरीक्षा प्रतिवेदन।
भाग VI: राज्य (अनुच्छेद 152-237)
- अध्याय I: साधारण
- अनुच्छेद 152: परिभाषा।
- अध्याय II: कार्यपालिका
- अनुच्छेद 153: राज्यों के राज्यपाल।
- अनुच्छेद 154: राज्य की कार्यपालिका शक्ति।
- अनुच्छेद 155: राज्यपाल की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 156: राज्यपाल की पदावधि।
- अनुच्छेद 157: राज्यपाल के पद के लिए योग्यताएँ।
- अनुच्छेद 158: राज्यपाल के पद के लिए शर्तें।
- अनुच्छेद 159: राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 160: कुछ आकस्मिकताओं में राज्यपाल के कृत्यों का निर्वहन।
- अनुच्छेद 161: क्षमा आदि की और कुछ मामलों में दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण की राज्यपाल की शक्ति।
- अनुच्छेद 162: राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार।
- अनुच्छेद 163: राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद।
- अनुच्छेद 164: मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध।
- अनुच्छेद 165: राज्य का महाधिवक्ता।
- अनुच्छेद 166: राज्य सरकार के कार्य का संचालन।
- अनुच्छेद 167: राज्यपाल को जानकारी देने आदि के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य।
- अध्याय III: राज्य का विधानमंडल
- अनुच्छेद 168: राज्यों के विधानमंडलों का गठन।
- अनुच्छेद 169: राज्यों में विधान परिषदों का उत्सादन या सृजन।
- अनुच्छेद 170: विधानसभाओं की संरचना।
- अनुच्छेद 171: विधान परिषदों की संरचना।
- अनुच्छेद 172: राज्यों के विधानमंडलों की अवधि।
- अनुच्छेद 173: राज्य के विधानमंडल की सदस्यता के लिए योग्यता।
- अनुच्छेद 174: राज्य के विधानमंडल के सत्र, सत्रावसान और विघटन।
- अनुच्छेद 175: सदन या सदनों को अभिभाषण का और संदेश भेजने का राज्यपाल का अधिकार।
- अनुच्छेद 176: राज्यपाल का विशेष अभिभाषण।
- अनुच्छेद 177: सदनों के संबंध में मंत्रियों और महाधिवक्ता के अधिकार।
- अनुच्छेद 178: विधानसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष।
- अनुच्छेद 179: अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना।
- अनुच्छेद 180: अध्यक्ष के पद के कर्तव्यों का पालन करने या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने की उपाध्यक्ष या अन्य व्यक्ति की शक्ति।
- अनुच्छेद 181: जब अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को हटाने का संकल्प विचाराधीन हो, तब वह पीठासीन नहीं होगा।
- अनुच्छेद 182: विधान परिषद का सभापति और उपसभापति।
- अनुच्छेद 183: सभापति और उपसभापति का पद रिक्त होना, पदत्याग और पद से हटाया जाना।
- अनुच्छेद 184: सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन करने या सभापति के रूप में कार्य करने की उपसभापति या अन्य व्यक्ति की शक्ति।
- अनुच्छेद 185: जब सभापति या उपसभापति को हटाने का संकल्प विचाराधीन हो, तब वह पीठासीन नहीं होगा।
- अनुच्छेद 186: अध्यक्ष और उपाध्यक्ष तथा सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते।
- अनुच्छेद 187: राज्य के विधानमंडल का सचिवालय।
- अनुच्छेद 188: सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 189: सदनों में मतदान, रिक्तियों के होते हुए भी सदनों की कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति।
- अनुच्छेद 190: स्थानों का रिक्त होना।
- अनुच्छेद 191: सदस्यता के लिए निरर्हताएँ।
- अनुच्छेद 192: सदस्यों की निरर्हताओं से संबंधित प्रश्नों पर विनिश्चय।
- अनुच्छेद 193: अनुच्छेद 188 के अधीन शपथ लेने या प्रतिज्ञान करने से पहले बैठने और मतदान करने के लिए दंड।
- अनुच्छेद 194: विधानमंडलों के सदनों की तथा उनके सदस्यों और समितियों की शक्तियाँ, विशेषाधिकार आदि।
- अनुच्छेद 195: सदस्यों के वेतन और भत्ते।
- अनुच्छेद 196: विधेयकों के पुरःस्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध।
- अनुच्छेद 197: धन विधेयकों से भिन्न विधेयकों के बारे में विधान परिषदों की शक्तियों पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 198: धन विधेयकों के संबंध में विशेष प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 199: धन विधेयक की परिभाषा।
- अनुच्छेद 200: विधेयकों पर अनुमति।
- अनुच्छेद 201: विचार के लिए आरक्षित विधेयक।
- अनुच्छेद 202: वार्षिक वित्तीय विवरण।
- अनुच्छेद 203: विधानमंडल में प्राक्कलनों के संबंध में प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 204: विनियोग विधेयक।
- अनुच्छेद 205: अनुपूरक, अतिरिक्त या अधिक अनुदान।
- अनुच्छेद 206: लेखानुदान, प्रत्ययानुदान और अपवादानुदान।
- अनुच्छेद 207: वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध।
- अनुच्छेद 208: प्रक्रिया के नियम।
- अनुच्छेद 209: राज्य के विधानमंडल में वित्तीय कार्य संबंधी प्रक्रिया का विधि द्वारा विनियमन।
- अनुच्छेद 210: विधानमंडल में प्रयोग की जाने वाली भाषा।
- अनुच्छेद 211: विधानमंडल में चर्चा पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 212: न्यायालयों द्वारा विधानमंडल की कार्यवाही की जाँच न किया जाना।
- अध्याय IV: राज्यपाल की विधायी शक्तियाँ
- अनुच्छेद 213: विधानमंडल के अवकाश के दौरान अध्यादेश जारी करने की राज्यपाल की शक्ति।
- अध्याय V: राज्यों के उच्च न्यायालय
- अनुच्छेद 214: राज्यों के लिए उच्च न्यायालय।
- अनुच्छेद 215: उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना।
- अनुच्छेद 216: उच्च न्यायालयों का गठन।
- अनुच्छेद 217: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति और पद की शर्तें।
- अनुच्छेद 218: उच्चतम न्यायालय से संबंधित कुछ प्रावधानों का उच्च न्यायालयों पर लागू होना।
- अनुच्छेद 219: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान।
- अनुच्छेद 220: स्थायी न्यायाधीश रहने के बाद वकालत पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 221: न्यायाधीशों के वेतन आदि।
- अनुच्छेद 222: किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय को अंतरण।
- अनुच्छेद 223: कार्यकारी मुख्य न्यायमूर्ति की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 224: अतिरिक्त और कार्यकारी न्यायाधीशों की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 224A: उच्च न्यायालयों की बैठकों में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 225: मौजूदा उच्च न्यायालयों की अधिकारिता।
- अनुच्छेद 226: कुछ रिट जारी करने की उच्च न्यायालय की शक्ति।
- अनुच्छेद 227: सभी न्यायालयों पर उच्च न्यायालय का अधीक्षण।
- अनुच्छेद 228: कुछ मामलों का उच्च न्यायालय को अंतरण।
- अनुच्छेद 229: उच्च न्यायालयों के अधिकारी और सेवक तथा व्यय।
- अनुच्छेद 230: उच्च न्यायालयों की अधिकारिता का संघ राज्य क्षेत्रों पर विस्तार।
- अनुच्छेद 231: दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना।
- अध्याय VI: अधीनस्थ न्यायालय
- अनुच्छेद 233: जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 233A: कुछ जिला न्यायाधीशों की नियुक्तियों का और उनके द्वारा दिए गए निर्णयों आदि का विधिमान्यकरण।
- अनुच्छेद 234: न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की भर्ती।
- अनुच्छेद 235: अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण।
- अनुच्छेद 236: निर्वचन।
- अनुच्छेद 237: इस अध्याय के उपबंधों का मजिस्ट्रेटों के कुछ वर्गों या वर्गों पर लागू होना।
भाग VII: पहली अनुसूची के भाग ख में राज्य (अनुच्छेद 238)
- अनुच्छेद 238: निरसित।
भाग VIII: संघ राज्य क्षेत्र (अनुच्छेद 239-242)
- अनुच्छेद 239: संघ राज्य क्षेत्रों का प्रशासन।
- अनुच्छेद 239A: कुछ संघ राज्य क्षेत्रों के लिए स्थानीय विधानमंडल या मंत्रिपरिषद या दोनों का सृजन।
- अनुच्छेद 239AA: दिल्ली के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 239AB: संवैधानिक तंत्र की विफलता की दशा में उपबंध।
- अनुच्छेद 239B: अध्यादेश प्रख्यापित करने की प्रशासक की शक्ति।
- अनुच्छेद 240: कुछ संघ राज्य क्षेत्रों के लिए विनियम बनाने की राष्ट्रपति की शक्ति।
- अनुच्छेद 241: संघ राज्य क्षेत्रों के लिए उच्च न्यायालय।
- अनुच्छेद 242: निरसित।
भाग IX: पंचायतें (अनुच्छेद 243-243O)
- अनुच्छेद 243: परिभाषाएँ।
- अनुच्छेद 243A: ग्राम सभा।
- अनुच्छेद 243B: पंचायतों का गठन।
- अनुच्छेद 243C: पंचायतों की संरचना।
- अनुच्छेद 243D: स्थानों का आरक्षण।
- अनुच्छेद 243E: पंचायतों की अवधि।
- अनुच्छेद 243F: सदस्यता के लिए निरर्हताएँ।
- अनुच्छेद 243G: पंचायतों की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व।
- अनुच्छेद 243H: पंचायतों द्वारा कर लगाने की शक्ति और निधियाँ।
- अनुच्छेद 243I: वित्तीय स्थिति के पुनर्विलोकन के लिए वित्त आयोग का गठन।
- अनुच्छेद 243J: पंचायतों के लेखाओं की लेखापरीक्षा।
- अनुच्छेद 243K: पंचायतों के लिए निर्वाचन।
- अनुच्छेद 243L: संघ राज्य क्षेत्रों पर लागू होना।
- अनुच्छेद 243M: इस भाग का कुछ क्षेत्रों पर लागू न होना।
- अनुच्छेद 243N: मौजूदा कानूनों और पंचायतों का जारी रहना।
- अनुच्छेद 243O: चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का निषेध।
भाग IX A: नगरपालिकाएँ (अनुच्छेद 243P-243ZG)
- अनुच्छेद 243P: परिभाषाएँ।
- अनुच्छेद 243Q: नगरपालिकाओं का गठन।
- अनुच्छेद 243R: नगरपालिकाओं की संरचना।
- अनुच्छेद 243S: वार्ड समितियों का गठन और संरचना।
- अनुच्छेद 243T: स्थानों का आरक्षण।
- अनुच्छेद 243U: नगरपालिकाओं की अवधि।
- अनुच्छेद 243V: सदस्यता के लिए निरर्हताएँ।
- अनुच्छेद 243W: नगरपालिकाओं की शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व।
- अनुच्छेद 243X: नगरपालिकाओं द्वारा कर लगाने की शक्ति और निधियाँ।
- अनुच्छेद 243Y: वित्त आयोग।
- अनुच्छेद 243Z: नगरपालिकाओं के लेखाओं की लेखापरीक्षा।
- अनुच्छेद 243ZA: नगरपालिकाओं के लिए निर्वाचन।
- अनुच्छेद 243ZB: संघ राज्य क्षेत्रों पर लागू होना।
- अनुच्छेद 243ZC: इस भाग का कुछ क्षेत्रों पर लागू न होना।
- अनुच्छेद 243ZD: जिला योजना के लिए समिति।
- अनुच्छेद 243ZE: महानगरीय योजना के लिए समिति।
- अनुच्छेद 243ZF: मौजूदा कानूनों और नगरपालिकाओं का जारी रहना।
- अनुच्छेद 243ZG: चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का निषेध।
भाग IX B: सहकारी समितियाँ (अनुच्छेद 243ZH-243ZT)
- अनुच्छेद 243ZH: परिभाषाएँ।
- अनुच्छेद 243ZI: सहकारी समितियों का निगमन।
- अनुच्छेद 243ZJ: बोर्ड के सदस्यों की संख्या और पदावधि।
- अनुच्छेद 243ZK: बोर्ड का निलंबन और प्रबंधन।
- अनुच्छेद 243ZL: लेखा परीक्षा।
- अनुच्छेद 243ZM: आम निकाय की बैठकें।
- अनुच्छेद 243ZN: जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।
- अनुच्छेद 243ZO: चुनाव आयोग।
- अनुच्छेद 243ZP: सहकारी समितियों का पंजीकरण।
- अनुच्छेद 243ZQ: अपराध और दंड।
- अनुच्छेद 243ZR: बहु-राज्य सहकारी समितियाँ।
- अनुच्छेद 243ZS: संघ राज्य क्षेत्रों पर लागू होना।
- अनुच्छेद 243ZT: मौजूदा कानूनों का जारी रहना।
भाग X: अनुसूचित और जनजातीय क्षेत्र (अनुच्छेद 244-244A)
- अनुच्छेद 244: अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन।
- अनुच्छेद 244A: असम के भीतर एक स्वायत्त राज्य का गठन और स्थानीय विधानमंडल या मंत्रिपरिषद का सृजन।
भाग XI: संघ और राज्यों के बीच संबंध (अनुच्छेद 245-263)
- अध्याय I: विधायी संबंध
- अनुच्छेद 245: संसद द्वारा और राज्यों के विधानमंडलों द्वारा बनाई गई विधियों का विस्तार।
- अनुच्छेद 246: संसद द्वारा और राज्यों के विधानमंडलों द्वारा बनाई गई विधियों की विषय-वस्तु।
- अनुच्छेद 247: कुछ अतिरिक्त न्यायालयों की स्थापना का उपबंध करने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 248: अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ।
- अनुच्छेद 249: राज्य सूची के किसी विषय के संबंध में राष्ट्रीय हित में कानून बनाने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 250: आपातकाल की उद्घोषणा के दौरान राज्य सूची के विषय के संबंध में कानून बनाने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 251: संसद द्वारा अनुच्छेद 249 और 250 के तहत बनाए गए कानूनों और राज्यों के विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों के बीच असंगति।
- अनुच्छेद 252: दो या अधिक राज्यों के लिए सहमति से कानून बनाने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 253: अंतर्राष्ट्रीय समझौतों को प्रभावी करने के लिए कानून।
- अनुच्छेद 254: संसद द्वारा बनाए गए कानूनों और राज्यों के विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों के बीच असंगति।
- अनुच्छेद 255: सिफारिशों और पूर्व अनुमति की आवश्यकता को केवल प्रक्रियात्मक मामला मानना।
- अध्याय II: प्रशासनिक संबंध
- अनुच्छेद 256: राज्यों और संघ की बाध्यता।
- अनुच्छेद 257: राज्यों पर संघ का नियंत्रण।
- अनुच्छेद 257A: निरसित।
- अनुच्छेद 258: कुछ मामलों में राज्यों को शक्ति प्रदान करने की संघ की शक्ति।
- अनुच्छेद 258A: राज्यों को कार्य सौंपने की राज्यों की शक्ति।
- अनुच्छेद 259: निरसित।
- अनुच्छेद 260: भारत के बाहर के क्षेत्रों के संबंध में संघ की अधिकारिता।
- अनुच्छेद 261: सार्वजनिक अधिनियम, अभिलेख और न्यायिक कार्यवाही।
- अनुच्छेद 262: अंतर-राज्यीय नदी-जल विवादों का न्यायनिर्णयन।
- अनुच्छेद 263: अंतर-राज्य परिषद के संबंध में उपबंध।
भाग XII: वित्त, संपत्ति, संविदाएँ और वाद (अनुच्छेद 264-300A)
- अध्याय I: वित्त
- अनुच्छेद 264: निर्वचन।
- अनुच्छेद 265: विधि के प्राधिकार के बिना कोई कर नहीं लगाया जाएगा।
- अनुच्छेद 266: भारत और राज्यों की संचित निधियाँ और लोक लेखे।
- अनुच्छेद 267: आकस्मिकता निधि।
- अनुच्छेद 268: संघ द्वारा लगाए गए लेकिन राज्यों द्वारा एकत्र और विनियोजित किए गए कर।
- अनुच्छेद 269: संघ द्वारा लगाए और एकत्र किए गए लेकिन राज्यों को सौंपे गए कर।
- अनुच्छेद 270: संघ और राज्यों के बीच करों का वितरण।
- अनुच्छेद 271: संघ के प्रयोजनों के लिए अधिभार।
- अनुच्छेद 272: निरसित।
- अनुच्छेद 273: जूट उत्पादों पर निर्यात शुल्क के स्थान पर अनुदान।
- अनुच्छेद 274: ऐसे कराधान पर जिसमें राज्यों के हित हैं, राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश की आवश्यकता।
- अनुच्छेद 275: कुछ राज्यों को संघ से अनुदान।
- अनुच्छेद 276: व्यवसायों, व्यापारों, आजीविकाओं और रोजगारों पर कर।
- अनुच्छेद 277: बचत।
- अनुच्छेद 278: निरसित।
- अनुच्छेद 279: “निवल आय” की गणना।
- अनुच्छेद 280: वित्त आयोग का गठन।
- अनुच्छेद 281: वित्त आयोग की सिफारिशें।
- अनुच्छेद 282: संघ या राज्य द्वारा अपने राजस्व से व्यय।
- अनुच्छेद 283: संचित निधियों, आकस्मिकता निधियों और लोक लेखे में जमा धन की अभिरक्षा।
- अनुच्छेद 284: लोक सेवकों और न्यायालयों द्वारा प्राप्त वादियों की जमा राशि।
- अनुच्छेद 285: संघ की संपत्ति को राज्य कराधान से छूट।
- अनुच्छेद 286: वस्तुओं की खरीद या बिक्री पर कर लगाने पर प्रतिबंध।
- अनुच्छेद 287: बिजली पर करों से छूट।
- अनुच्छेद 288: जल या बिजली के संबंध में राज्यों द्वारा कराधान से छूट।
- अनुच्छेद 289: किसी राज्य की संपत्ति और आय को संघ के कराधान से छूट।
- अनुच्छेद 290: कुछ व्ययों और पेंशनों के संबंध में समायोजन।
- अनुच्छेद 290A: कुछ देवस्वम निधियों को वार्षिक भुगतान।
- अनुच्छेद 291: निरसित।
- अध्याय II: उधार लेना
- अनुच्छेद 292: भारत सरकार द्वारा उधार लेना।
- अनुच्छेद 293: राज्यों द्वारा उधार लेना।
- अध्याय III: संपत्ति, संविदाएँ, अधिकार, दायित्व, बाध्यताएँ और वाद
- अनुच्छेद 294: उत्तराधिकार के मामले में संपत्ति, आस्तियाँ, अधिकार, दायित्व और बाध्यताएँ।
- अनुच्छेद 295: अन्य मामलों में उत्तराधिकार।
- अनुच्छेद 296: राजगामी या व्यपगत या स्वामीहीन संपत्ति।
- अनुच्छेद 297: समुद्र-संबंधी संपत्ति और संघ का अधिकार।
- अनुच्छेद 298: व्यापार करने आदि की शक्ति।
- अनुच्छेद 299: संविदाएँ।
- अनुच्छेद 300: वाद और कार्यवाही।
- अध्याय IV: संपत्ति का अधिकार
- अनुच्छेद 300A: विधि के प्राधिकार के बिना व्यक्तियों को संपत्ति से वंचित न किया जाना।
भाग XIII: भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर व्यापार, वाणिज्य और समागम (अनुच्छेद 301-307)
- अनुच्छेद 301: व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता।
- अनुच्छेद 302: व्यापार, वाणिज्य और समागम पर निर्बंधन लगाने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 303: व्यापार और वाणिज्य के संबंध में संघ और राज्यों की विधायी शक्तियों पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 304: राज्यों के बीच व्यापार, वाणिज्य और समागम पर निर्बंधन।
- अनुच्छेद 305: मौजूदा कानूनों और व्यापार के एकाधिकार को बचाने वाले कानूनों का प्रावधान।
- अनुच्छेद 306: निरसित।
- अनुच्छेद 307: अनुच्छेद 301 से 304 के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए प्राधिकरण की नियुक्ति।
भाग XIV: संघ और राज्यों के अधीन सेवाएँ (अनुच्छेद 308-323)
- अध्याय I: सेवाएँ
- अनुच्छेद 308: निर्वचन।
- अनुच्छेद 309: संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तें।
- अनुच्छेद 310: संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की पदावधि।
- अनुच्छेद 311: संघ या राज्य के अधीन सिविल क्षमता में नियोजित व्यक्तियों का बर्खास्त किया जाना, हटाया जाना या पद में अवनत किया जाना।
- अनुच्छेद 312: अखिल भारतीय सेवाएँ।
- अनुच्छेद 312A: कुछ सेवाओं के अधिकारियों की सेवा की शर्तों में बदलाव करने या रद्द करने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 313: संक्रमणकालीन उपबंध।
- अनुच्छेद 314: निरसित।
- अध्याय II: लोक सेवा आयोग
- अनुच्छेद 315: संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग।
- अनुच्छेद 316: सदस्यों की नियुक्ति और पदावधि।
- अनुच्छेद 317: लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को हटाया जाना और निलंबित किया जाना।
- अनुच्छेद 318: आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों के संबंध में विनियम बनाने की शक्ति।
- अनुच्छेद 319: आयोग के सदस्यों द्वारा पद पर न रहने के संबंध में प्रतिषेध।
- अनुच्छेद 320: लोक सेवा आयोगों के कार्य।
- अनुच्छेद 321: आयोगों के कार्यों का विस्तार करने की शक्ति।
- अनुच्छेद 322: लोक सेवा आयोगों का व्यय।
- अनुच्छेद 323: लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन।
भाग XIV A: न्यायाधिकरण (अनुच्छेद 323A-323B)
- अनुच्छेद 323A: प्रशासनिक न्यायाधिकरण।
- अनुच्छेद 323B: अन्य विषयों के लिए न्यायाधिकरण।
भाग XV: निर्वाचन (अनुच्छेद 324-329A)
- अनुच्छेद 324: निर्वाचनों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण एक निर्वाचन आयोग में निहित होना।
- अनुच्छेद 325: धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी भी व्यक्ति को मतदाता सूची में शामिल करने से रोकना नहीं।
- अनुच्छेद 326: लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के लिए निर्वाचन वयस्क मताधिकार के आधार पर।
- अनुच्छेद 327: विधानमंडलों के लिए निर्वाचन के संबंध में प्रावधान करने की संसद की शक्ति।
- अनुच्छेद 328: किसी राज्य के विधानमंडल के लिए निर्वाचन के संबंध में प्रावधान करने की उस राज्य के विधानमंडल की शक्ति।
- अनुच्छेद 329: चुनावी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का निषेध।
- अनुच्छेद 329A: प्रधानमंत्री और अध्यक्ष के निर्वाचन के संबंध में विशेष प्रावधान। (निरसित)
भाग XVI: कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध (अनुच्छेद 330-342)
- अनुच्छेद 330: लोकसभा में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण।
- अनुच्छेद 331: लोकसभा में एंग्लो-इंडियन समुदाय का प्रतिनिधित्व।
- अनुच्छेद 332: राज्यों की विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों का आरक्षण।
- अनुच्छेद 333: राज्यों की विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय का प्रतिनिधित्व।
- अनुच्छेद 334: सीटों के आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व का 70 वर्ष बाद समाप्त होना।
- अनुच्छेद 335: सेवाओं और पदों के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के दावे।
- अनुच्छेद 336: कुछ सेवाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 337: एंग्लो-इंडियन समुदाय के लाभ के लिए शैक्षणिक अनुदान के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 338: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग।
- अनुच्छेद 338A: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग।
- अनुच्छेद 339: संघ का अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के संबंध में नियंत्रण।
- अनुच्छेद 340: पिछड़े वर्गों की दशाओं की जाँच के लिए आयोग की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 341: अनुसूचित जातियाँ।
- अनुच्छेद 342: अनुसूचित जनजातियाँ।
भाग XVII: राजभाषा (अनुच्छेद 343-351)
- अध्याय I: संघ की भाषा
- अनुच्छेद 343: संघ की राजभाषा।
- अनुच्छेद 344: राजभाषा के संबंध में आयोग और संसद की समिति।
- अध्याय II: प्रादेशिक भाषाएँ
- अनुच्छेद 345: राज्य की राजभाषा या राजभाषाएँ।
- अनुच्छेद 346: एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि की राजभाषा।
- अनुच्छेद 347: किसी राज्य की जनसंख्या के किसी भाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अध्याय III: उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों आदि की भाषा
- अनुच्छेद 348: उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में और अधिनियमों, विधेयकों आदि के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा।
- अनुच्छेद 349: भाषा से संबंधित कुछ कानूनों को अधिनियमित करने के लिए विशेष प्रक्रिया।
- अध्याय IV: विशेष निर्देश
- अनुच्छेद 350: शिकायतों के निवारण के लिए अभ्यावेदन में प्रयुक्त भाषा।
- अनुच्छेद 350A: प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाएँ।
- अनुच्छेद 350B: भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी।
- अनुच्छेद 351: हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश।
भाग XVIII: आपात उपबंध (अनुच्छेद 352-360)
- अनुच्छेद 352: राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा।
- अनुच्छेद 353: आपातकाल की उद्घोषणा का प्रभाव।
- अनुच्छेद 354: जब आपातकाल की उद्घोषणा प्रवृत्त हो, तब राजस्व के वितरण से संबंधित प्रावधानों का लागू होना।
- अनुच्छेद 355: बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से राज्यों की रक्षा करने का संघ का कर्तव्य।
- अनुच्छेद 356: राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता की दशा में उपबंध (राष्ट्रपति शासन)।
- अनुच्छेद 357: अनुच्छेद 356 के तहत की गई उद्घोषणा के तहत विधायी शक्तियों का प्रयोग।
- अनुच्छेद 358: आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 के प्रावधानों का निलंबन।
- अनुच्छेद 359: आपातकाल के दौरान भाग III के उपबंधों के प्रवर्तन का निलंबन।
- अनुच्छेद 360: वित्तीय आपातकाल के संबंध में उपबंध।
भाग XIX: प्रकीर्ण (अनुच्छेद 361-367)
- अनुच्छेद 361: राष्ट्रपति और राज्यपालों का संरक्षण।
- अनुच्छेद 361A: संसद और राज्य विधानमंडलों की कार्यवाही के प्रकाशन के संबंध में संरक्षण।
- अनुच्छेद 361B: लाभ का पद।
- अनुच्छेद 362: निरसित।
- अनुच्छेद 363: कुछ संधियों, समझौतों आदि से उत्पन्न विवादों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का निषेध।
- अनुच्छेद 363A: शासकों को मान्यता की समाप्ति और प्रिवी पर्स का उन्मूलन।
- अनुच्छेद 364: प्रमुख बंदरगाहों और हवाई अड्डों के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 365: संघ द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने में विफल रहने पर प्रभाव।
- अनुच्छेद 366: परिभाषाएँ।
- अनुच्छेद 367: निर्वचन।
भाग XX: संविधान का संशोधन (अनुच्छेद 368)
- अनुच्छेद 368: संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसके लिए प्रक्रिया।
भाग XXI: अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध (अनुच्छेद 369-392)
- अनुच्छेद 369: राज्य सूची में कुछ विषयों के संबंध में कानून बनाने की संसद की अस्थायी शक्ति।
- अनुच्छेद 370: जम्मू और कश्मीर राज्य से संबंधित अस्थायी प्रावधान।
- अनुच्छेद 371: कुछ राज्यों के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 371A: नागालैंड के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 371B: असम के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 371C: मणिपुर के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 371D: आंध्र प्रदेश के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 371E: आंध्र प्रदेश में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना।
- अनुच्छेद 371F: सिक्किम के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 371G: मिजोरम के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 371H: अरुणाचल प्रदेश के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 371I: गोवा के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 371J: कर्नाटक के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 372: मौजूदा कानूनों का जारी रहना और उनका अनुकूलन।
- अनुच्छेद 372A: कानूनों को अनुकूलित करने की राष्ट्रपति की शक्ति।
- अनुच्छेद 373: निवारक निरोध के संबंध में कुछ मामलों में आदेश जारी करने की राष्ट्रपति की शक्ति।
- अनुच्छेद 374: संघीय न्यायालय के न्यायाधीशों और लंबित कार्यवाहियों के संबंध में प्रावधान।
- अनुच्छेद 375: न्यायालयों, अधिकारियों और प्राधिकरणों का संविधान के अधीन कार्य करते रहना।
- अनुच्छेद 376: उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के संबंध में प्रावधान।
- अनुच्छेद 377: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक के संबंध में प्रावधान।
- अनुच्छेद 378: लोक सेवा आयोग के संबंध में प्रावधान।
- अनुच्छेद 378A: आंध्र प्रदेश विधान सभा की अवधि के संबंध में विशेष प्रावधान।
- अनुच्छेद 379-391: निरसित।
- अनुच्छेद 392: कठिनाइयों को दूर करने की राष्ट्रपति की शक्ति।
भाग XXII: संक्षिप्त शीर्षक, प्रारंभ और निरसन (अनुच्छेद 393-395)
- अनुच्छेद 393: संक्षिप्त शीर्षक।
- अनुच्छेद 394: प्रारंभ।
- अनुच्छेद 394A: हिंदी भाषा में प्राधिकृत पाठ।
- अनुच्छेद 395: निरसन।
हमें उम्मीद है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 से 395 पर आधारित इस विस्तृत लेख ने आपके ज्ञान को बढ़ाया होगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आपकी मदद की होगी। संविधान एक ऐसा विषय है जिसे बार-बार दोहराने की आवश्यकता होती है, और हम चाहते हैं कि यह पोस्ट आपके लिए एक स्थायी और विश्वसनीय स्रोत बनी रहे।
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